Cough Syrup Death Case: कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत मामले में तमिलनाडु के औषधि नियंत्रण विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए जो इशारा करते हैं कि तमिलनाडु के औषधि नियंत्रण प्रणाली की लापरवाही की वजह ले ही मध्य प्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौतें हुई हैं. एनडीटीवी को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जांच में ये भी सामने आया है कि तमिलनाडु औषधि प्राधिकरण ने नियमों की अनदेखी की.
राज्य ड्रग कंट्रोलर आर्गेनाइजेशन ने केंद्रीय सिफारिश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की और कंपनी दशकों से चलती रही. सूत्रों के मुताबिक, CDSCO की जांच में भी कई बड़े तथ्य सामने आए हैं. जिस फार्मा कंपनी को उत्पादन की अनुमति दी गई थी उस गतिविधि की विभाग ने ठीक से निगरानी नहीं की. CDSCO ने इस घटना को राज्य की नियामक प्रणाली की नाकामी बताया है.
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CDSCO रिपोर्ट की मुख्य बातें
- कंपनी पर ठीक से निगरानी नहीं की गई. जिस श्री सन फार्मा को 2011 में लाइसेंस दिया गया था और 2016 में रिन्यू भी किया गया, लेकिन फैक्ट्री की हालत बेहद खराब थी.
- तमिलनाडु ड्रग कंट्रोलर आर्गेनाइजेशन ने कभी भी कंपनी के बारे में केंद्र सरकार को जानकारी नहीं दी.
- रिपोर्ट में डाटा और रजिस्ट्रेशन में भी कई बड़ी गड़बड़ियां सामने आई हैं.
- दवाओं की बेहतर निगरानी के लिए केंद्र ने एक राष्ट्रीय डाटा तैयार करने का नियम लागू किया है, लेकिन कंपनी ने कभी भी राष्ट्रीय डाटा पोर्टल पर खुद को रजिस्टर नहीं किया, जबकि यह ज़रूरी था.
- यह राज्य नियामक की जिम्मेदारी है कि वह राज्य में इस नियम को लागू करे, लेकिन तमिलनाडु ने ऐसा नहीं किया.
- अक्तूबर 2023 में केंद्र ने सभी राज्यों से एक गूगल फॉर्म साझा कर उनसे कंपनियों की जानकारियां देने के लिए कहा था.
- इस बात को हर बार महीने की समीक्षा बैठक और राज्य एफडीए की बैठक में दोहराया गया, लेकिन श्री सन फार्मा ने पंजीकरण नहीं कराया. न ही राज्य ने उन्हें इसमें शामिल होने में मदद की.
- कंपनी SUGAM पोर्टल पर भी दर्ज नहीं थी, जो कानून के तहत अनिवार्य है.
- यहां भी कंपनी को पंजीकृत कराने की मुख्य जिम्मेदारी तमिलनाडु के औषधि नियंत्रण विभाग के पास थी
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तमिलनाडु सरकार की लापरवाही कैसे, जानें
सीडीएससीओ के किसी भी ऑडिट में श्री सन फार्मा कंपनी शामिल नहीं रही. जबकि अपने क्षेत्र में सभी दवा कंपनियों की ऑडिट में लाने की जिम्मेदारी राज्य की है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच के दौरान भी कई समस्याएं सामने आई हैं. MP FDA के कहने पर तमिलनाडु ने 1–2 अक्टूबर को ऑडिट किया, लेकिन केंद्र को इसकी जानकारी नहीं दी. 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीम तमिलनाडु के कांचीपुरम पहुंची.
जब जांच के लिए केंद्रीय टीम फैक्ट्री पहुंची तो राज्य के औषधि अधिकारी कई बार फोन करने पर भी नहीं आए. उसी रात राज्य ने कहा कि सिरप में 48% DEG मिला है और फैक्ट्री सील कर दी, इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो गई. क्योंकि उससे पहले छिंदवाड़ा और नागपुर से लिए गए सैंपल्स की जांच में DEG नहीं मिला था.4 अक्टूबर को CDSCO ने लाइसेंस रद्द करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की. 8 अक्टूबर को एमपी पुलिस ने कंपनी के मालिक को गिरफ्तार कर लिया था, पर तमिलनाडु ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है.
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तमिलनाडु की कंपनी ने नहीं किया मानकों का पालन
जांच के मुताबिक, तमिलनाडु की कंपनी ने मानकों का भी पालन नहीं किया. कंपनी के पास WHO-GMP प्रमाणपत्र नहीं था. केंद्र की दो अधिसूचनाओं (2023 और 2025) के बावजूद कंपनी ने आवेदन नहीं दिया और राज्य ने भी सख्ती नहीं की. तमिलनाडु की औषधि नियंत्रण प्रणाली ने न तो कंपनी पर समय पर कार्रवाई की और न ही सही निगरानी रखी. इसी वजह से जहरीला सिरप बाजार में पहुंचा और बच्चों की जानें गईं. सीडीएससीओ ने सभी राज्यों को दवा निगरानी सख्त करने की सलाह दी है. इससे पहले CAG रिपोर्ट में भी तमिलनाडु औषधि नियंत्रण विभाग की लापरवाही का जिक्र किया गया था. 2016 से 2022 तक की रिपोर्ट का मूल्यांकन करने पर पता चला था कि औषधि विभाग ने दवा की सैंपलिंग और निरीक्षण में भारी कमी की थी.
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