दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद सहित पूरे क्षेत्र में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) तेजी से बढ़ रहा है। कई इलाकों में AQI 600 के आसपास या उससे भी अधिक दर्ज किया गया, जो सामान्य मानक से कई गुना खराब है और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गंभीर श्रेणी में आता है। स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए केंद्र द्वारा स्वीकृत ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-4 लागू कर दिया गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी जहरीली हवा लंबे समय तक रहने से सांस की बीमारियों, हृदय संबंधी समस्याओं और आंखों में जलन जैसी दिक्कतें तेजी से बढ़ सकती हैं। ग्रेटर नोएडा के परीचौक और आसपास के इलाकों में सुबह एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 563 तक पहुंच गया। वहीं कुछ हॉटस्पॉट क्षेत्रों में प्रदूषण स्तर इससे भी अधिक दर्ज किया गया, जो हालात को और गंभीर बनाता है।
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लगातार बिगड़ती हवा ने बढ़ाई चिंताएं
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और सांस तथा हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर पड़ रहा है। लोगों में आंखों में जलन, गले में खराश, सिरदर्द और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। स्कूल प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आउटडोर गतिविधियों पर रोक लगा दी है। कई इलाकों में सुबह का घना स्मॉग दृश्यता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है, जिससे यातायात भी प्रभावित हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
गंभीर हवा की स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के लिए तुरंत ठोस और प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदूषण रोकथाम के उपायों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मामले पर विस्तृत सुनवाई आने वाले दिनों में निर्धारित की गई है।
पूरे क्षेत्र में लागू हुआ GRAP-4
स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए केंद्र द्वारा स्वीकृत ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-4 लागू कर दिया गया है। यह प्रदूषण नियंत्रण का सबसे कठोर स्तर माना जाता है, जिसके तहत कई गतिविधियों पर तत्काल रोक लग जाती है। स्टेज-4 के तहत निर्माण और विध्वंस कार्य पूरी तरह बंद कर दिए जाते हैं, दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाता है, डीज़ल वाहनों की आवाजाही सीमित की जाती है, और बड़े उद्योगों व पावर प्लांट्स पर कड़ी निगरानी शुरू हो जाती है। साथ ही प्रदूषण फैलाने वाली किसी भी गतिविधि पर तुरंत एक्शन लिया जाता है।
GRAP-4 लागू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में प्रदूषण के स्तर में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि हवा की रफ्तार बेहद कम होने के कारण फिलहाल प्रदूषण में तत्काल गिरावट की संभावना कम है। जब तक वायु प्रवाह में सुधार नहीं होता, तब तक स्मॉग और AQI दोनों ऊँचे स्तर पर बने रह सकते हैं।
बचाव के लिए लोग क्या करें?
विशेषज्ञों ने लोगों को अत्यधिक प्रदूषण के बीच बाहर कम निकलने, एन-95 जैसे प्रभावी मास्क पहनने, घरों में एयर प्यूरीफायर के इस्तेमाल और सुबह-शाम की सैर से बचने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि वायु गुणवत्ता इतनी खराब हो चुकी है कि इसे ‘इमरजेंसी लेवल’ माना जा सकता है। दिल्ली-एनसीआर की हवा कब सुधरेगी, यह आने वाले दिनों में सरकारी कदमों की प्रभावशीलता और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा। फिलहाल हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं।
GRAP-4: दिल्ली में अब क्या-क्या बैन?
दिल्ली-एनसीआर में खतरनाक प्रदूषण स्तर के बाद GRAP स्टेज 4 लागू कर दिया गया है। इसके तहत यह सख्त पाबंदियां लागू होती हैं—
1. भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित
दिल्ली में ट्रक, लोडर और अन्य भारी वाहनों का प्रवेश बंद।
केवल आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई करने वाले वाहनों को छूट।
2. निर्माण और तोड़फोड़ पर पूर्ण प्रतिबंध
सभी तरह के कंस्ट्रक्शन और डिमॉलिशन गतिविधियां बंद।
सिर्फ मेडिकल, मेट्रो, रेलवे, रोड्स जैसे आवश्यक प्रोजेक्ट्स को शर्तों के साथ छूट मिल सकती है।
3. स्कूल–कॉलेज और दफ्तर के संबंध में प्रावधान
राज्य सरकार जरूरत के अनुसार स्कूलों की ऑनलाइन क्लासेस शुरू करने का फैसला ले सकती है।
सरकारी और निजी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम का विकल्प लागू किया जा सकता है।
4. ऑड-ईवन लागू करने पर विचार
GRAP-4 के दौरान ऑड-ईवन स्कीम लागू की जा सकती है, हालांकि यह अनिवार्य नहीं है।
5. सरकारी और निजी कार्यालयों में स्टाफ लिमिट
दफ्तरों को 50% क्षमता के साथ चलाने की सलाह।
बाकी कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम।
6. डीजल वाहनों पर कठोर रोक
दिल्ली में रजिस्टर्ड बीएस-IV या उससे कम श्रेणी के मध्यम और भारी डीजल वाहनों पर प्रतिबंध।
केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को छूट।
7. NCR दफ्तरों के लिए भी नियम
दिल्ली-एनसीआर के सभी कार्यालयों को 50% स्टाफ के साथ काम करने की सलाह, शेष कर्मचारी WFH करेंगे।
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