Women Kabaddi World Cup 2025: कभी धूल भरे मिट्टी के मैदान में नंगे पांव दौड़ती एक साधारण आदिवासी लड़की आज विश्व कबड्डी वर्ल्ड कप 2025 की मोस्ट वैल्यूबल प्लेयर बन गई है। यह सिर्फ एक खिलाड़ी की जीत नहीं, यह उन सभी बेटियों के सपनों की जीत है जिन्हें गरीबी अक्सर चुप रहने को मजबूर करती है। हाल ही में महिला कबड्डी वर्ल्ड कप 2025 में भारत की बेटियों ने फाइनल में जीत के साथ इतिहास में एक और गौरवपूर्ण दिन देश के नाम कर दिया। भारतीय महिला कबड्डी खिलाड़ियों की जीत बेहद खास है, वो भी तब जब वे विषम परिस्थियों ता सामना करके आगे आईं हों। इन खिलाड़ियों में एक नाम संजू देवी का है जिनकी भूमिका विश्व कप 2025 में दमदार रही। आइए जानते हैं संजू देवी के संघर्ष से जीत की कहानी।
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कौन हैं संजू देवी?
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के छोटे आदिवासी गाँव में जन्मी संजू देवी का बचपन तंगहाली और संघर्ष में बीता। पिता मजदूर, माँ गृहिणी थी, ऐसे में संसाधन सीमित थे पर संजू की इच्छाशक्ति असीम थी। साल 2016 में गांव के स्थानीय टूर्नामेंट से उनके खेल सफर की शुरुआत हुई। तभी जिला कबड्डी संघ व ज्योति क्लब ने इस कच्चे हीरे को पहचाना और निःशुल्क प्रशिक्षण देकर खेल के बड़े दरवाज़े खोल दिए।
संजू की प्रतिभा को मिली दिशा
इसके बाद बहतराई एक्सीलेंस सेंटर की पहली बालिका कबड्डी आवासीय अकादमी में उनका चयन हुआ। यहीं पर कोच दिल कुमार राठौर ने संजू की प्रतिभा को तराशा। ट्रेनिंग के दौरान संजू को आधुनिक सुविधाएं, फिजियोथेरेपी, रणनीतिक प्रशिक्षण, वह सब कुछ मिला, जिसने उनके आत्मविश्वास को पंख दिए। फिर शुरू हुआ असली सफर राज्य से राष्ट्रीय और राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक के मैच तक पहुंचने का और अपने दमदार प्रदर्शन से ग्लोबल स्तर पर अपनी पहचान बनाने का।
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साल 2025 रहा स्वर्णिम
भारतीय महिला कबड्डी खिलाड़ियों और खासकर संजू देवी के लिए साल 2025 स्वर्णिम रहा। मार्च 2025 में हुए एशियन महिला कबड्डी चैंपियनशिप में भारत को स्वर्ण पदक मिला। लेकिन संजू के करियर की सबसे बड़ी चमक तब मिली, जब नवंबर में हुए महिला कबड्डी वर्ल्ड कप 2025 में भारत को ऐतिहासिक जीत मिली।
ढाका में खेले गए फाइनल में संजू देवी ने 16 अंक बटोरकर खेल का रुख पलट दिया। एक सुपर रेड ने उन्हें असली मैच टर्नर साबित कर दिया। नतीजतन उन्हें मोस्ट वैल्यूबल प्लेयर (एमवीपी आफ द टूर्नामेंट) से सम्मानित किया गया।
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