रायपुर: राजधानी के तेलीबांधा थाना क्षेत्र के जूक बार में रविवार देर रात सनसनीखेज वारदात सामने आई। दुर्ग-भिलाई का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर प्रखर चंद्राकर अपने पांच–छह साथियों के साथ शराबखोरी कर रहा था, तभी वहां पहुंचे कारोबारी अजय शंकर पांडेय पर आरोपियों ने जानलेवा हमला कर दिया। आरोपियों ने कारोबारी को बेरहमी से पीटते हुए प्रखर चंद्राकर ने पिस्टल के बट्टे से उनके चेहरे पर वार किया और नाक की हड्डी तोड़ डाली।
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प्रखर चंद्राकर वही अपराधी है जिसने हाल ही में भिलाई-दुर्ग में पुलिस पर फायरिंग करने वाले कुख्यात हिस्ट्रीशीटर बदमाश अमित जोश को पिस्टल सप्लाई की थी। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रखर चंद्राकर की मां भाजपा नेत्री हैं और पूर्व में भिलाई से चुनाव भी लड़ चुकी हैं। जेल से महज दो हफ्ते पहले ही रिहा हुआ प्रखर चंद्राकर दोबारा खुलेआम राजधानी में आतंक फैलाने उतारू हो गया। हमले में शामिल आरोपियों में हिस्ट्रीशीटर पुलकित चंद्राकर (307 का फरार आरोपी), हिस्ट्रीशीटर मुकुल सोना, प्रेम और अन्य अपराधी शामिल बताए जा रहे हैं।
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पुलिस ने दो आरोपियों को हिरासत में लिया है, जबकि एक आरोपी थाने से ही फरार हो गया। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि इस मामले में गृहमंत्री की छवि ख़राब करने के लिए उनके नाम का इस्तेमाल करके अमन प्रताप सिंह नामक युवक ने थाने पहुंचकर आरोपियों को तत्काल छोड़ने के लिए पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की। हालांकि मामला गंभीर होने के कारण पुलिस ने तत्काल रिहाई से इनकार कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी की कानून-व्यवस्था और पुलिस पर राजनीतिक दबाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जेल से छूटे कुछ ही दिनों में हिस्ट्रीशीटर अपराधी खुलेआम पिस्टल लहराते हुए कारोबारी पर हमला कैसे कर रहे हैं और सत्ता से जुड़े लोग ऐसे अपराधियों को बचाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं?
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