रायपुर: राजधानी रायपुर में रविवार शाम एक सनसनीखेज और भावनात्मक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। गौ रक्षा से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता आदेश सोनी ने गौ हत्या के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए एक ऐसा कदम उठाया जिसने हर किसी को चौंका दिया। वे शहर की व्यस्त सड़क के बीच बने डिवाइडर पर बैठे और अपने हाथ की छोटी उंगली को चपड़ से काट डाला। इस घटना के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भीड़ जुट गई।
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आदेश सोनी ने मौके पर ही कहा कि जब उन्होंने अपनी उंगली काटी तो उन्हें जरा भी दर्द महसूस नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि जब गौ हत्या करने वाले निर्दोष पशुओं का गला काटते हैं तो उनके हाथ नहीं कांपते, फिर गौ रक्षा के लिए बलिदान देते समय हमारे हाथ क्यों कांपेंगे? उनकी यह बात सुनकर मौजूद लोग हैरान रह गए। सूचना मिलते ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां पहुंची। आदेश सोनी को तुरंत एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी उंगली पूरी तरह से अलग हो चुकी है, हालांकि उनकी हालत स्थिर है और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें निगरानी में रखा गया है। पुलिस ने घटना की जानकारी उच्च अधिकारियों को दी और आसपास सुरक्षा बढ़ा दी।
आदेश सोनी लंबे समय से गौ हत्या और गौ तस्करी के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। वे समय-समय पर सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करते हैं और प्रशासन से कठोर कार्रवाई की मांग करते रहते हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि यह कदम उनके अटूट विश्वास और गौ माता के प्रति समर्पण को दर्शाता है। लेकिन इस घटना पर समाज में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे ‘गौ रक्षा के लिए असाधारण साहस’ बता रहे हैं, तो वहीं अन्य इसे ‘आत्मघाती और खतरनाक कदम’ मान रहे हैं। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों का कहना है कि विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए जिससे समाज में जागरूकता बढ़े, न कि ऐसा जिससे स्वयं की जान खतरे में पड़ जाए।
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सोशल मीडिया पर यह घटना तेजी से वायरल हो रही है। आदेश सोनी के समर्थक उनके इस कदम को ऐतिहासिक बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कई लोगों ने यह भी लिखा कि गौ रक्षा का आंदोलन अहिंसा और जनजागरूकता से आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि आत्मत्याग से संदेश तो जाता है लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में गौ हत्या और गौ तस्करी लंबे समय से विवादित मुद्दा रहा है। राज्य में गौशालाओं और गौ सेवा योजनाओं के बावजूद गौ संरक्षण की चुनौती बनी हुई है। ऐसे में आदेश सोनी का यह कदम इस मुद्दे को और गरमा देगा तथा सरकार और समाज दोनों के सामने सवाल खड़ा करेगा कि आखिर गौ रक्षा की लड़ाई किस दिशा में और किस तरीके से लड़ी जानी चाहिए।
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