कांकेर: छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएचएम कर्मचारी संघ के बैनर तले राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के 16 हज़ार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 18 अगस्त से 10 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। आज आंदोलन के 16वें दिन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जिला कांकेर के करीब 655 हड़ताली कर्मचारी अपने-अपने ब्लॉक में हड़ताल पर बैठे रहे। एनएचएम संविदा साथी मुकेश कुमार चौहान लैब टेक्नीशियन कोरबा का आकस्मिक निधन होने पर धरना स्थल मिनी स्टेडियम में कर्मचारियों ने 2 मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही सरकार से अपनी मांगे मनवाने व सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए मंगलवार को हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ कर हवन यज्ञ भी किया और संविदा प्रथा की पूर्णाहुति दी।
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पिछली कांग्रेस सरकार में 27 प्रतिशत की वेतन वृद्धि छत्तीसगढ़ के सभी संविदा कर्मचारियों के लिए किया गया था, जिसमें सोलह हजार एनएचएम कर्मचारियों भी शामिल थे पर इन स्वास्थ्य कर्मचारियों को आज तक 27 प्रतिशत वेतन बढ़ोतरी का लाभ नहीं मिला है। कई सालों से अटकाकर रखा गया है। इसी प्रकार तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने अपने कार्यकाल के अंतिम क्षण में संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों को नियमितीकरण करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया था पर पिछली सरकार मागों को पूरा नहीं कर सकी। इस बात पर तत्कालीन स्वास्थ्य टीएस सिंहदेव ने बयान दिया है कि कांग्रेस और उनके स्वयं के हर का कारण संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं करना भी एक प्रमुख कारण है। स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों की पीड़ा को मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव से लेकर विधानसभा सत्र में भी मजबूती से रखेंगे। उन्होंने लड़ेंगे और जीतेंगे के नारे के साथ कर्मचारियों में आशा का संचार भी किया।
175 से अधिक ज्ञापन देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं
जिलाध्यक्ष दीपक वर्मा ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी ने मोदी की गारंटी का नारा देते हुए अपना घोषणा पत्र बनाया, जिसमें हम एनएचएम कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का वादा किया गया है। इस सरकार के कार्यकाल में 175 से अधिक ज्ञापन देने के पश्चात कोई सुनवाई न होने पर विवश होकर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत कार्यरत 16 हज़ार संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। बर्खास्तगी की नोटिस के बाद आंदोलन और तेज हो गया है।
दो दशक बाद भी शोषण की पराकाष्ठा, आरपार की लड़ाई जारी रहेगी
कांकेर ब्लॉक अध्यक्ष गौरव सोनी ने कहा कि शोषण की पराकाष्ठा हो चुकी है। 20 साल का शोषण का समय छोटा मोटा समय नहीं है। 20 साल में से 15 साल भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार यहां थी। दूसरे राज्यों की अपेक्षा छत्तीसगढ़ राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। इसी के विरोध में हमने शासन के दमन के आगे ना झुकने का फैसला किया है।
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हड़ताली कर्मचारियों ने कहा – 5 मांगे पूरी करने की बात भ्रामक
हड़ताली कर्मचारियों ने स्वास्थ्य मंत्री के इस बयान का भी खंडन किया है कि एनएचएम के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की 10 सूत्री मांगों में से पांच मांगें पूरी कर दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि यह पूरी तरह से सही नहीं है और भ्रामक बात है। 10 में से केवल एक ही मांग है जिस पर सर्कुलर जारी हुआ है। अन्य किसी भी मांग पर उचित निर्णय नहीं लिया गया है। मांगों के स्वरूप को बदलने का प्रयास शासन- प्रशासन द्वारा किया जा रहा है। दो दशकों से शोषित, पीड़ित, अल्प वेतन में काम कर रहे एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी अपने नियमितीकरण, स्थायीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर, ग्रेड पे, अनुकंपा नियुक्ति जैसी जरूरी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, जिस पर वर्तमान सरकार बहुत बार निवेदन करने और ज्ञापन देने के पश्चात भी कोई सुनवाई नहीं की है।
कर्मचारियों का कहना है कि हमारी मांगों को केंद्र सरकार के मत्थे मढ़ा जा रहा है, जबकि तकनीकी रूप से प्रदेश में स्वास्थ्य और स्वास्थ्य के कर्मचारियों का पूरा विषय राज्य सरकार के निर्णय के अधीन होता है। हड़ताल में जिला अध्यक्ष दीपक वर्मा, गौरव सोनी, देवकुमार सोम, मनेन्द्र कुमार, डॉ योगेश प्रजापति, दीपक राजपूत, संजीव मिश्रा, विनोद वैद्य, शीतल साहू, लेखन पुरी गोस्वामी, सोनसाय मांडवी, किरण देवदास, रीना सलाम, पूर्णिमा यादव, हिरकनी साहू, क्रिस्टीना सेन, उषा बघेल, ख़ेमनारायण साहू, पवन वर्मा, प्रियंका कौशल, पद्मनी रजक, ट्विंकल बेसरा, संजना सिंह, खिलेश्वर जैन, भारती साहू सहित बड़ी संख्या में एनएचएम कर्मचारी उपस्थित थे।
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