वॉशिंगटन/सिडनी: दुनिया में जीवित इंसानों को खाने वाला कीड़ा मिलने से हड़कंप मच गया है। मेक्सिको में इसके 5086 केस सामने आ गए हैं, जिनमें 3 दर्जन से अधिक मामले इंसानों में रिपोर्ट किए गए हैं। एनपीआर न्यूज के अनुसार अमेरिका में पहली बार जिंदा इंसानों का मांस खाने वाले इस परजीवी के बारे में पता चला है। अमेरिका के एक इंसान में पहला मामला दर्ज किया गया है। इससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई है। आइये जानते हैं कि जिंदा इंसानों को खाने वाला ये पैरासाइट कौन है और कैसे जीवित इंसानों और जानवरों का मांस खा जाता है?
दुनिया में आया इंसानों को जिंदा खा जाने वाला पैरासाइट
इस पैरासाइट का नामन्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म रखा गया है। यह एक स्क्रू की तरह जिंदा इंसानों और जानवरों के घाव में अंदर की ओर घुसता जाता है। इसकी बनावट भी कुछ स्क्रू जैसी है। इसलिए इसे स्क्रूवॉर्म कहा गया है। अमेरिका में पहले मानव में स्क्रूवॉर्म का मामला दर्ज किया गया है। यह परजीवी है, जो दक्षिण अमेरिका से उत्तर की ओर अब फैल रहा है। इससे अमेरिका के पशु उद्योग में हाल के महीनों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
मेक्सिको में मिले 5086 केस
इस पैरासाइट के सबसे ज्यादा केस मेक्सिको में दर्ज किए गए हैं। यहां इंसानों और जानवरों में कुल 5086 केस मिले हैं, जिनमें करीब 41 मामले इंसानों के हैं। जबकि अन्य मामले जानवरों के हैं। इनमें गाय, कुत्ते, घोड़े और अन्य जानवर शामिल हैं। वहीं यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने मैरीलैंड स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से 4 अगस्त को अमेरिका में भी इस मामले की पुष्टि की है। यह स्क्रूवॉर्म एक ऐसे मरीज में पाया गया जो एल सल्वाडोर की यात्रा से लौटकर आया था। स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के प्रवक्ता एंड्रयू निक्सन ने NPR को यह जानकारी दी।
क्या है न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म?
CDC के अनुसार, न्यू वर्ल्ड स्क्रूवॉर्म एक प्रकार की परजीवी मक्खी है जो सामान्यतः दक्षिण अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्रों में पाई जाती है। इसकी मादा मक्खी अपने अंडे जीवित जानवरों की घाव वाली त्वचा या शरीर के किसी खुले हिस्से में देती है। अंडों से निकली लार्वा (कीड़े) जानवर के मांस को जीवित अवस्था में खाकर संक्रमित करती है। मानव मामलों में यह संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन यह अत्यंत पीड़ादायक हो सकता है और इलाज न मिलने पर जानलेवा भी हो सकता है।
मस्तिष्क तक पहुंच सकता है कीड़ा
उत्तरी कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैक्स स्कॉट ने बताया, “अगर संक्रमण की शुरुआत हो जाए तो और मक्खियां अंडे देना शुरू कर देती हैं तो इसके कीड़े मस्तिष्क या शरीर के अन्य संवेदनशील हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, जिससे सेप्सिस (रक्त संक्रमण) जैसी गंभीर स्थितियां बन जाती हैं।” हालांकि यह वायरस नहीं है, बल्कि एक कीट है, इसलिए संक्रमण संक्रामक नहीं होता।
अमेरिका में पशु उद्योग क्यों है चिंतित?
पिछले एक साल में यह परजीवी मैक्सिको के पशु फार्मों में पाया गया और अब यह अमेरिका-मेक्सिको सीमा की ओर बढ़ रहा है। इस खतरे को देखते हुए अमेरिकी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। 2025 में USDA ने इस परजीवी से निपटने के लिए टेक्सास के एडिनबर्ग में अमेरिका का पहला “स्टेराइल फ्लाई प्रोडक्शन फैसिलिटी” बनाने की योजना की घोषणा की, जहां हर हफ्ते 30 करोड़ बांझ मक्खियां तैयार की जाएंगी। इस तकनीक में मक्खियों को रेडिएशन से बांझ बनाकर उन्हें वातावरण में छोड़ दिया जाता है। ताकि मादा मक्खियाँ बांझ नर से संभोग करें और अंडे न दे सकें। इस तकनीक से अमेरिका ने 1966 में स्क्रूवॉर्म को खत्म कर दिया था और 2017 में फ्लोरिडा में फिर से हुए एक छोटे प्रकोप को भी नियंत्रित किया गया था।
अब कहां और क्यों फैल रहा है यह परजीवी?
प्रोफेसर स्कॉट के अनुसार, इसका कारण संक्रमित पशुओं का आवागमन, मौजूदा स्टेराइल मक्खियों की प्रभावशीलता में कमी व प्राकृतिक अवरोधों का टूटना हो सकता है। पनामा, कोस्टा रिका, निकारागुआ और होंडुरास में हाल ही में नए मामले सामने आए हैं। 2024 में कोस्टा रिका में एक मानव की मौत हुई। यह 1990 के बाद पहली मानव मौत मानी जा रही है। जुलाई 2025 में निकारागुआ ने 124 मामलों की पुष्टि की। अमेरिका ने मैक्सिको से मवेशियों के आयात पर नवंबर 2024 में रोक लगाई गई थी, जिसे फरवरी में हटाकर मई में फिर लागू कर दिया गया। इस स्क्रूवॉर्म पर नियंत्रण के लिए एक नया स्टेराइल फ्लाई प्लांट मैक्सिको में 2026 तक तैयार होगा।
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