रायपुर: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की वार्षिक रिपोर्ट 2023 आ गई है. इसमें छत्तीसगढ़ का देश के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से दो मामलों में टॉप फाइव की सूची में शामिल है. आकस्मिक मृत्यु दर के मामले में तीसरे स्थान पर, तो वहीं आत्महत्या दर के मामले में चौथे स्थान पर रहा.
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एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, देश के 28 राज्यों में आकस्मिक मृत्यु दर सबसे अधिक महाराष्ट्र (55.1) में दर्ज की गई, उसके बाद हरियाणा (53.7) और छत्तीसगढ़ (52.9) का स्थान रहा, जबकि राष्ट्रीय औसत 31.9 है. बात करें केंद्र शासित प्रदेश की तो लद्दाख और पुडुचेरी में आकस्मिक मृत्यु दर क्रमशः 75.4 और 66.5 रही.
रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 2023 में 16,011 आकस्मिक मौतें दर्ज की गई, जिनमें 230 प्राकृतिक कारणों से और 15,781 अन्य कारणों’ से हुईं. इसके पहले वर्ष 2022 में राज्य में 16,893 आकस्मिक मौतें दर्ज की गई, जिनमें 248 प्राकृतिक कारणों से और 16,645 ‘अन्य कारणों’ से हुई थी. इस लिहाज से वर्ष 2023 में इन मामलों में 5.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
देश में प्राकृतिक कारणों से हुई कुल 6,444 आकस्मिक मौतों में से 39.7 फीसदी (2,560) मौतें ‘आकाशीय बिजली’ की चपेट में आने से हुईं. छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक आपदाओं के कारण हुई 230 मौतों में से 180 आकाशीय बिजली की चपेट में आने से हुईं.
देश में 2023 के दौरान नकली शराब के सेवन की कुल 456 घटनाओं में 522 मौतें हुई. इसमें छत्तीसगढ़ 37 मौतों के साथ देश में चौथे स्थान पर रहा.
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वहीं 2023 में 28 राज्यों में सिक्किम (40.2), केरल (30.6) और तेलंगाना (27.7) के बाद छत्तीसगढ़ में आत्महत्या की दर 26 फीसदी रही. हालांकि, छत्तीसगढ़ में 2023 में 7,868 आत्महत्या दर्ज की गई, जो 2022 में दर्ज की गई संख्या 8446 से 6.8 प्रतिशत कम है.
इस साल अखिल भारतीय आत्महत्या दर (प्रति एक लाख जनसंख्या पर आत्महत्याओं की संख्या) 12.3 थी. अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह (49.6) और पुडुचेरी (28) उन केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हैं, जो आत्महत्या की दर में छत्तीसगढ़ से आगे हैं.
आंकड़ों का करेंगे विश्लेषण – गृहमंत्री विजय शर्मा
एनसीआरबी की वार्षिक रिपोर्ट पर गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि आंकड़ा मंगलवार को जारी हुआ है. उसको देखने की आवश्यकता है, उसका विश्लेषण कर हम काम करेंगे. आंकड़ा आज-कल का नहीं है, बल्कि 2 साल पहले का है. इसीलिए पहले उसे देखना समझना जरूरी है.
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