Kesarbai Kerkar Voice Floating In Space: जब भी शास्त्रीय संगीत की बात होती है, तो कुछ फनकारों के नाम पीढ़ियों से पार जाकर अमर हो जते हैं। लेकिन एक नाम ऐसा है, जिन्हें शायद आज की पीढ़ी न जानती हो हालांकि उनकी आवाज पीढ़ियों को ही नहीं बल्कि पृथ्वी को पार कर अंतरिक्ष तक में गूंज रही हैं। शुभांशु शुक्ला अपना मिशन पूरा करके अंतरिक्ष से लौट रहे हैं। वहीं भारत के ही राकेश शर्मा को सबसे पहले अंतरिक्ष की यात्रा के लिए जाना जाता है। लेकिन इस महिला की आवाज ने अंतरिक्ष की यात्रा ही नहीं की, बल्कि वहीं पर बस गई। यहां बात हो रही है भारतीय फनकार केसरबाई केरकर की।
Sukma Naxal Encounter: घने जंगलों में पुलिस-नक्सली मुठभेड़, दोनों ओर से हो रही फायरिंग
केसरबाई केरकर ने न सिर्फ सुरों को साधा, बल्कि उन्हें सितारों तक पहुंचा दिया। उनका गाया “जात कहां हो” गीत आज भी अंतरिक्ष में गूंज रहा है और पूरी दुनिया के लिए भारतीय संगीत की पहचान बना हुआ है। आइए जानते हैं केसरबाई केरकर के बारे में।
केसरबाई का जीवन
केसरबाई केरकर का जन्म 1892 में गोवा के ‘केरी’ गांव में एक देवदासी परंपरा वाले परिवार में हुआ। समाज को लगा कि मंदिर उनका अंतिम पड़ाव होगा, लेकिन केसर बाई ने परंपराओं की बेड़ियां तोड़ दीं और अपने सुरों को नया आसमान दिया। महज 16 साल की उम्र में वो मुंबई चली आईं और कई गुरुओं से शास्त्रीय संगीत की तालीम ली।
संगीत की तालीम
फिर उन्हें मिला उस्ताद अल्लादिया खान का साथ। पहले तो उस्ताद ने उन्हें ठुकरा दिया, लेकिन केसर बाई रुकी नहीं। उन्होंने शाहू महाराज से मदद मांगी और उस्ताद अल्लादिया खान की शिष्य बन गईं। फिर अगले 25 साल तक उन्होंने समर्पण के साथ रियाज किया। हर सुर में आत्मा भर दी, हर राग को जिया।
)
सुरश्री की मिली उपाधि
1938 में रवींद्रनाथ टैगोर ने उन्हें ‘सुरश्री’ की उपाधि दी और उन्हें पद्म भूषण और संगीत नाटक अकादमी जैसे पुरस्कार भी मिले। लेकिन केसरबाई को पुरस्कारों से ज्यादा संगीत प्रिय था। वो कहती थीं, “संगीत को महसूस किया जाता है, बेचा नहीं।”
CG NEWS : न्यायधानी में ट्रैफिक नियमों की उड़ाईं धज्जियां, कार सवार युवकों ने सड़क पर मचाया हुड़दंग

जब केसरबाई की आवाज पहुंची अंतरिक्ष में
1977 में NASA ने जब अपना यान Voyager 1 अंतरिक्ष में भेजा, तो उसके साथ एक Golden Record भी गया, जिसमें दुनिया के 27 देशों की सबसे सुंदर आवाजें दर्ज थीं। भारत से सिर्फ एक ही आवाज चुनी गई, वो भी केसरबाई केरकर की। उनकी राग भैरवी में गाई गई रचना “जात कहां हो” को चुना गया था, जिसे रॉबर्ट ई. ब्राउन ने हिंदुस्तानी संगीत की सबसे सुंदर रिकॉर्डिंग माना। आज Voyager 1 करीब 13 अरब मील दूर पहुंच चुका है, लेकिन उसकी गहराइयों में एक भारतीय महिला की आवाज “जात कहां हो?” गूंज रही है।
आज जब हम राकेश शर्मा या शुभांशु शुक्ला जैसे अंतरिक्ष यात्रियों की बात करते हैं, तो हमें ये भी याद रखना चाहिए कि केसरबाई केरकर की आवाज उस दौर में अंतरिक्ष में पहुंच गई थी, जब महिलाओं का मंच पर आना भी कठिन था। उनकी यह यात्रा बताती है कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती, वो पृथ्वी से निकलकर ब्रह्मांड तक पहुंच सकता है।
Vishva News serves as the Editor of Vishva News, a Hindi-language news outlet. He is credited as the author of articles covering local, regional, and national developments.

