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झलमला में बढ़ा मलेरिया का खतरा : रोज 10 मरीज अस्पताल पहुंच रहे, स्टाफ की कमी और डीडीटी छिड़काव नहीं होने से बढ़ी चिंता

Vishva News / Wed, Jul 29, 2026 / Post views : 50

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चिल्फी घाटी। लगातार हो रही बारिश के बीच वनांचल क्षेत्र झलमला में मलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। झलमला स्थित 20 बिस्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन औसतन 10 मलेरिया मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। जामुनपानी, मुड़वाही, सोनवाही सहित आसपास के लगभग 20 गांवों के हजारों ग्रामीण इसी अस्पताल पर निर्भर हैं। बढ़ते संक्रमण के बावजूद प्रभावित गांवों में अब तक न तो डीडीटी का छिड़काव कराया गया है और न ही मच्छरदानियों का वितरण किया गया है, जिससे

ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

बारिश से बढ़ा मच्छरों का प्रकोप

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण गांवों में जगह-जगह जलभराव हो गया है, जिससे मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसका असर अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या पर साफ दिखाई दे रहा है। रोजाना बड़ी संख्या में बुखार और मलेरिया के मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।

स्टाफ की कमी से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था

स्वास्थ्य केंद्र गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल के सात कर्मचारियों को अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में अटैच कर दिया गया है, जिससे अस्पताल की अधिकांश व्यवस्था केवल एक आरएमए (RMA) के भरोसे संचालित हो रही है। सीमित कर्मचारियों को 24 घंटे लगातार सेवाएं देनी पड़ रही हैं, जिससे मरीजों के उपचार पर भी असर पड़ रहा है।

गंभीर मरीजों को करना पड़ रहा रेफर

ग्रामीणों के अनुसार गंभीर मलेरिया मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है। उनका दावा है कि इस माह क्षेत्र में मलेरिया और तेज बुखार से छह से अधिक लोगों की मौत हुई है। हालांकि, इन मौतों की आधिकारिक पुष्टि स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं की गई है।

20 बिस्तरों का अस्पताल पड़ रहा छोटा

बढ़ते मरीजों के कारण 20 बिस्तरीय अस्पताल में जगह कम पड़ने लगी है। कई बार मरीजों और उनके परिजनों को वार्ड में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। ग्रामीणों का कहना है कि झलमला अस्पताल आसपास के करीब 20 गांवों का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, इसलिए इसे 50 बिस्तरीय अस्पताल में उन्नत किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने राज्य शासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल से बाहर अटैच कर्मचारियों को तत्काल वापस बुलाया जाए, पर्याप्त डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियों की नियुक्ति की जाए तथा प्रभावित गांवों में डीडीटी छिड़काव, मच्छरदानी वितरण, घर-घर मलेरिया जांच अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम तत्काल शुरू किए जाएं, ताकि बरसात के मौसम में बढ़ते मलेरिया संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

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