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Vishva News / Fri, Sep 26, 2025 / Post views : 4
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए जयशंकर ने कहा, "यह एक सच्चाई है। आप इससे भाग नहीं सकते। वैश्विक कार्यबल राजनीतिक बहस का विषय हो सकता है लेकिन, इससे कोई बच नहीं सकता। अगर आप मांग और जनसांख्यिकी को देखें, तो कई देशों में मांगें पूरी नहीं हो पाती हैं, सिर्फ राष्ट्रीय जनसांख्यिकी के कारण।"
गांव में सनसनीखेज वारदात: पेट्रोल से कार और बाइक में आग लगाई, लोग सहमेविदेश मंत्री ने एक ऐसे वैश्विक कार्यबल के निर्माण का आह्वान किया जो अधिक स्वीकार्य, समकालीन और कुशल हो। उन्होंने कहा, "हम वैश्विक कार्यबल का एक अधिक स्वीकार्य, समकालीन, कुशल मॉडल कैसे बना सकते हैं, जो एक वितरित, वैश्विक कार्यस्थल पर स्थित हो? मुझे लगता है कि आज यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है जिसका समाधान अंतर्राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को करना होगा।"
जयशंकर की यह टिप्पणी व्यापार और शुल्क चुनौतियों के साथ-साथ आव्रजन पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बीच आई है। H-1B वीजा लंबे समय से भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी पाने का अहम जरिया रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, इस वीजा के लगभग तीन-चौथाई लाभार्थी भारतीय होते हैं। इसके तहत कंपनियां आईटी, मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों को नियुक्त कर सकती हैं। लेकिन, ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा पर एक लाख डॉलर की नई फीस लगा दी है। यह रकम पहले से मौजूद फाइलिंग और लीगल खर्चों के अलावा होगी, इससे वीजा बेहद महंगा हो जाएगा।
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