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Vishva News / Thu, Nov 13, 2025 / Post views : 35
रायपुर : छत्तीसगढ़ में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सप्लाई हो रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। बीते 13 दिनों में जांच के दौरान नौ दवाओं के बैच अमानक मिले हैं। स्वास्थ्य संस्थानों से इन्हें वापस मंगाकर अस्थायी रूप से रोक लगाई गई है। तीन दवाओं पर तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया है और कंपनियों पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। संभवत: हर माह दवाओं के बैच अमानक मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) ने दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है।
धान खरीदी में डिजिटल क्रांति: ‘तुहर टोकन मोबाइल ऐप’ से किसानों को घर बैठे मिलेगी टोकन, खत्म होंगी समितियों की लंबी कतारेंअब दवा कंपनियों को अपनी दवाओं की पैकिंग (कार्टन) पर क्यूआर कोड (जीएस-1 सिस्टम) लगाना अनिवार्य होगा। इस कोड को स्कैन करते ही दवा का नाम, निर्माण कंपनी, निर्माण तिथि, बैच नंबर, लाइसेंस डिटेल और एक्सपायरी डेट की पूरी जानकारी मोबाइल पर दिखाई देगी। सीजीएमएससी के अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था करीब 1,800 प्रकार की दवाओं पर लागू की गई है और इसे कॉर्पोरेशन की ई-टेंडर नीति में भी शामिल किया गया है।
Cold Wave Alert: छत्तीसगढ़ में ठंड का असर तेज, रायपुर और कई जिलों में शीतलहर का अलर्टनई प्रणाली से नकली, अमानक और एक्सपायरी दवाओं की सप्लाई पर रोक लगेगी तथा दवा वितरण और स्टाक प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी। दवा कंपनियां स्वयं उत्पादों पर कोडिंग का कार्य करेंगी। यह पहल राज्य के स्वास्थ्य तंत्र को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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