Thu, 30 Jul
--°C ...
Logo

ब्रेकिंग

8वीं के छात्र से 100-100 बार गंदी गाली लिखवाई, अभिभावकों के सिग्नेचर भी मांगे; जांच के आदेश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिलांग कोर्ट में किया आत्मसमर्पण, अब जेल में रहकर चलेगा ट्रायल

सप्लाई बाधित होने की आशंका से बढ़ी चिंता, भारत में सिलेंडर कीमतों पर पड़ सकता है असर

साथी का मोबाइल चुराकर बनाई नई UPI ID, ऑनलाइन गेमिंग की लत में गंवाई पूरी रकम

अभनपुर के लखना गांव में सनसनी, हत्या की आशंका; पहचान में जुटी पुलिस

सस्ते टूर पैकेज के झांसे में फंसाकर मांगी 1.20 करोड़ की फिरौती, 5 भारतीय गिरफ्तार

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, मरम्मत, शौचालय, वाहन स्टैंड और ट्रांसफार्मर की मांग

नाले में कार बहने के बाद चला लगातार रेस्क्यू, विशेषज्ञ गोताखोरों ने बरामद किए शव

रोज 10 मरीज अस्पताल पहुंच रहे, स्टाफ की कमी और डीडीटी छिड़काव नहीं होने से बढ़ी चिंता

महेंद्रा ट्रेवल्स की बस हादसे का शिकार, 10–12 यात्री घायल; पुलिस जांच में जुटी

सूचना

hello php

: Asia First Woman Loco Pilot: 36 वर्षों की सफलता भरी पारी के बाद रिटायर होंगी देश की पहली महिला लोको पायलट सुरेखा यादव

Vishva News / Mon, Sep 22, 2025 / Post views : 20

Share:
भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नई इबारत लिखने वाली एशिया की पहली महिला लोको पायलट सुरेखा यादव अब अपने शानदार करियर को विराम देने जा रही हैं। इस महीने के अंत तक सुरेखा यादव सेवानिवृत्त हो जाएंगी। उनकी 36 वर्षों की सेवा न केवल रेलवे विभाग के लिए गर्व का विषय रही, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम भी साबित हुआ। Chhattisgarh : गहरे कुएं में गिरा हाथी, वन विभाग की टीम ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन
कैसे शुरू हुआ सफर सुरेखा यादव का जन्म 2 सितंबर 1965 को महाराष्ट्र के सतारा ज़िले में हुआ था। शुरुआत में वो शिक्षिका बनने का सपना देखती थीं और बीएड करने की योजना बना रही थीं, लेकिन इलेक्ट्रिकल डिप्लोमा और तकनीकी पृष्ठभूमि के चलते उनका रुझान रेलवे की ओर हुआ। साल 1986 में उन्होंने सहायक ड्राइवर पद के लिए आवेदन किया, और 1989 में भारतीय रेलवे में बतौर सहायक लोको पायलट उनकी नियुक्ति हुई।
सुरेखा यादव ने रेलवे में प्रवेश करते ही एक इतिहास रच दिया। वो न केवल भारत की, बल्कि पूरे एशिया की पहली महिला ट्रेन ड्राइवर बनीं। एक ऐसे समय में जब ट्रेन ड्राइविंग को पुरुषों का पेशा माना जाता था, सुरेखा ने यह मिथक तोड़ा और खुद को साबित किया। मालगाड़ी से शुरुआत करने वाली सुरेखा की ड्राइविंग स्किल्स ने जल्द ही उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। वर्ष 2000 में मोटर महिला के पद पर प्रमोशन मिला। 2011 में मेल एक्सप्रेस ट्रेन चलाने वाली पहली महिला पायलट बनीं। उन्होंने डेक्कन क्वीन जैसी खतरनाक रूट पर भी ट्रेन चलाई, जिससे उनकी क्षमता का लोहा माना गया।
CG Crime : भतीजे ने हंसिया से किया चाचा पर हमला, मौके पर हुई बुजुर्ग की मौत
वंदे भारत चलाने वाली पहली महिला पायलट 13 मार्च 2023 को सुरेखा यादव ने एक और कीर्तिमान रचते हुए सोलापुर से मुंबई के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलाई। ये न सिर्फ उनके करियर का, बल्कि पूरे भारतीय रेलवे का गर्व का क्षण था। रेलवे परंपरा के अनुसार, किसी भी पायलट की अंतिम सेवा को विशेष सम्मान के साथ पूरा किया जाता है। सुरेखा यादव ने अपनी अंतिम जिम्मेदारी राजधानी एक्सप्रेस को चलाकर पूरी की। उन्होंने दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन से मुंबई के सीएसएमटी तक ट्रेन चलाई, जो उनकी शानदार सेवा के सम्मान का प्रतीक बन गया। महिला सशक्तिकरण की प्रतीक सुरेखा यादव का करियर केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि महिलाओं के लिए नए दरवाज़े खोलने वाला प्रेरणास्रोत है। उनके पहले कदम ने हजारों लड़कियों को यह यकीन दिलाया कि कोई भी क्षेत्र सिर्फ पुरुषों के लिए आरक्षित नहीं होता।

Tags :

Share News:

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें