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Vishva News / Sat, Aug 30, 2025 / Post views : 38
चोट के बावजूद 45 सेकंड में जीती रेस
ट्रैक पर पानी देवी का साहस देखने लायक था। घुटने और एंकल में चोट होने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। परंपरागत घाघरा-चोली पहनकर जब वे ट्रैक पर उतरीं, तो सभी की निगाहें उन पर टिक गईं। 100 मीटर की दौड़ उन्होंने महज 45 सेकंड में पूरी की और स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनके इस जज़्बे ने दर्शकों को खड़ा होकर तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
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कठिन परिस्थितियों में बीता जीवन
पानी देवी का जीवन हमेशा आसान नहीं रहा। वे उस दौर में पली-बढ़ीं जब लड़कियों को पढ़ाई और खेलों की आज़ादी नहीं थी। 15 साल की उम्र में शादी हो गई और 50 की उम्र में वे अकेले ही 5 बेटों और 3 बेटियों का पालन-पोषण करने लगीं। परिवार का खर्च चलाने के लिए खेतों में मजदूरी की और दूर-दराज तक सूत बेचकर अपना जीवन चलाया।
91 साल की उम्र में लिया एथलेटिक्स का फैसला
कभी न हार मानने वाली पानी देवी ने जिंदगी का नया सफर 91 साल की उम्र में शुरू किया। अपने पोते को पैरा-एथलीट्स को ट्रेन करते देखकर उन्होंने कहा, “मैं भी यह कर सकती हूं।” और वहीं से उनकी एथलेटिक्स यात्रा की शुरुआत हुई। जिस उम्र में लोग बिस्तर पकड़ लेते हैं, उस उम्र में उन्होंने खेल के मैदान में कदम रखा।
तीन गोल्ड मेडल की अद्भुत उपलब्धि
बेंगलुरु में आयोजित राष्ट्रीय मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता में पानी देवी ने 100 मीटर रेस, डिस्कस थ्रो और शॉट पुट तीनों में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। उनकी उपलब्धि इस बात का सबूत है कि सही जज़्बा हो तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
प्रेरणा की मिसाल बनीं ‘सुपर दादी’
पानी देवी की यह यात्रा हम सभी को यह संदेश देती है कि नई शुरुआत करने की कोई उम्र नहीं होती। चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, हिम्मत और मेहनत से हर सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने अपने साहस से यह साबित किया कि सपने देखने की उम्र तय नहीं होती, उन्हें पूरा करने की हिम्मत ही मायने रखती है।
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