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: Preeti Rajak Success Story: एशियन गेम्स की सिल्वर मेडलिस्ट प्रीति रजक बनीं सेना की पहली महिला सूबेदार, जानें उनकी प्रेरणादायक यात्रा

Vishva News / Mon, Oct 27, 2025 / Post views : 42

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Preeti Rajak Success Story: मध्य प्रदेश के प्रीति रजक ने भारतीय सेना में पहली महिला सूबेदार बनकर इतिहास रच दिया है। इसके पहले उन्होंने एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतकर अपने नाम उपलब्धि हासिल की। प्रीति की उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह उस परिवर्तन की कहानी है जो समाज में तब आता है जब महिलाओं को अवसर और भरोसा दोनों मिलते हैं। उन्होंने दिखाया कि अगर लगन और मेहनत सच्ची हो, तो सामाजिक या आर्थिक सीमाएं किसी भी सपने को छोटा नहीं कर सकतीं।
प्रीति रजक सिर्फ एक खिलाड़ी या अधिकारी नहीं हैं वे एक प्रेरक प्रतीक हैं, जो भारत की बेटियों को यह विश्वास दिलाती हैं कि अगर हौसला हो तो कोई मंजिल दूर नहीं। ड्राइ-क्लीनर की बेटी से भारतीय सेना की पहली महिला सूबेदार बनना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय है। आइए जानते हैं प्रीति रजक के जीवन संघर्षों और उपलब्धियों के बारे में।
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सूबेदार प्रीति रजक की प्रारंभिक जीवन और परिवार मध्यप्रदेश के इतारसी में जन्मी प्रीति रजक एक साधारण परिवार से हैं। उनके पिता एक ड्राइ-क्लीनर हैं और माता सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने कभी प्रीति के सपनों को छोटा नहीं समझा। माता-पिता ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें वह मंच दिलाने में सहयोग दिया, जहां से उन्होंने इतिहास रच दिया। प्रीति रजक की ट्रेनिंग प्रीति ने 2015 में मध्यप्रदेश शूटिंग अकादमी में दाखिला लिया। शुरुआत में यह सिर्फ रुचि थी, लेकिन धीरे-धीरे यह जुनून बन गई। ट्रैप शूटिंग में उन्होंने खुद को निखारा और कोचों के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी जगह बनाई। एशियन गेम्स में सफलता 2022 के हैंगझोऊ एशियन गेम्स में प्रीति रजक ने ट्रैप महिला टीम इवेंट में सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया। यह उनके करियर का निर्णायक क्षण था, जिसने उन्हें नई पहचान दिलाई और भारतीय सेना के लिए दरवाजे खोले।
Gold-Silver Price Today: रिकॉर्ड हाई के बाद फिर टूटी चमक, सोना-चांदी हुई सस्‍ती! सेना में योगदान और ऐतिहासिक पदोन्नति दिसंबर 2022 में प्रीति ने कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस में हवलदार के रूप में प्रवेश किया। शूटिंग में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और अनुशासन के चलते जनवरी 2024 में उन्हें आउट आफ टर्न प्रमोशन देकर पहली महिला सूबेदार बनाया गया। यह भारतीय सेना के इतिहास का स्वर्णिम क्षण था, जब पहली बार किसी महिला ने यह पद हासिल किया। प्रीति की कहानी क्यों खास है? प्रीति रजक की यात्रा हर उस भारतीय लड़की के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती है। उन्होंने दिखाया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, मेहनत और अनुशासन से हर बाधा को पार किया जा सकता है। उन्होंने साबित किया कि सेना, शूटिंग या किसी भी क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों के बराबर काबिल हैं। जब संस्थाएं जैसे सेना, खेल मंत्रालय या अकादमियां महिलाओं को अवसर देती हैं, तो न केवल व्यक्ति बल्कि पूरा समाज आगे बढ़ता है। 

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