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Vishva News / Fri, Sep 5, 2025 / Post views : 54
वालंटियर्स ने बढ़ाया कार्य
Educate Girls की रीढ़ उसकी टीम है, यानी स्थानीय वालंटियर्स, जिन्हें प्रेरक कहा जाता है। ये घर-घर जाकर उन बच्चियों को खोजते जो स्कूल से बाहर रह गई थीं। वे उनका दाखिला करवाते, पढ़ाई में मदद करते और यह सुनिश्चित करते कि बच्चियां स्कूल छोड़ने की गलती न करें। यह समुदाय-आधारित मॉडल शिक्षा को आंदोलन बना देता है।
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एनजीओ बना दुनिया का पहला इम्पेक्ट बाॅन्ड
सफीना हुसैन ने 24 लाख बच्चों तक अपनी एनजाओ की पहुंच बनाई और 90% से ज्यादा टिके रहने की दर साबित की। 2015 में इसने दुनिया का पहला डेवलपमेंट इम्पैक्ट बाॅन्ड लॉन्च किया। यह एक ऐसा मॉडल है, जिसमें फंडिंग सीधे बच्चों की शिक्षा और सीखने के नतीजों से जुड़ी थी। इस प्रयोग ने शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की नई मिसाल पेश की।
किशोरियों को फिर से पढ़ने का मौका
जो लड़कियां शिक्षा से कट चुकी थीं, उनके लिए इस एनजीओ ने प्रगति कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत हजारों किशोरियों को मुफ्त शिक्षा केंद्रों में दोबारा पढ़ाई का अवसर मिला। नतीजा यह हुआ कि 31,500 से अधिक लड़कियां अब कक्षा 10 और 12 की डिग्री हासिल कर रही हैं। यह कदम सिर्फ शिक्षा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा बदलाव है।
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रेमन मैग्सेस अवार्ड और भविष्य का सपना
2025 में Educate Girls ने इतिहास रचते हुए रेमन मैग्सेस पुरस्कार हासिल किया। भारत के 50 से ज्यादा विजेताओं में यह पहला NGO है। अब इसका लक्ष्य 2035 तक पूर्वोत्तर भारत से लेकर वैश्विक स्तर तक 1 करोड़ जिंदगियों को बदलना है।
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