Wed, 28 Oct
--°C ...
Logo

ब्रेकिंग

वायरल वीडियो से 10 की पहचान, 2 बालिगों पर कार्रवाई

नशे में झूमते युवकों के बीच विवाद, युवक को बेरहमी से पीटने का वीडियो सामने आया

8वीं के छात्र से 100-100 बार गंदी गाली लिखवाई, अभिभावकों के सिग्नेचर भी मांगे; जांच के आदेश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिलांग कोर्ट में किया आत्मसमर्पण, अब जेल में रहकर चलेगा ट्रायल

सप्लाई बाधित होने की आशंका से बढ़ी चिंता, भारत में सिलेंडर कीमतों पर पड़ सकता है असर

साथी का मोबाइल चुराकर बनाई नई UPI ID, ऑनलाइन गेमिंग की लत में गंवाई पूरी रकम

अभनपुर के लखना गांव में सनसनी, हत्या की आशंका; पहचान में जुटी पुलिस

सस्ते टूर पैकेज के झांसे में फंसाकर मांगी 1.20 करोड़ की फिरौती, 5 भारतीय गिरफ्तार

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, मरम्मत, शौचालय, वाहन स्टैंड और ट्रांसफार्मर की मांग

नाले में कार बहने के बाद चला लगातार रेस्क्यू, विशेषज्ञ गोताखोरों ने बरामद किए शव

सूचना

hello php

: V Sripathi: बच्चे को जन्म देने के सिर्फ 2 दिन बाद परीक्षा पास कर तमिलनाडु की पहली आदिवासी महिला जज बनीं वी. श्रीपाथी

Vishva News / Thu, Oct 23, 2025 / Post views : 42

Share:
V Sripathi: कभी-कभी कुछ कहानियां सिर्फ प्रेरणा नहीं, बल्कि साहस की परिभाषा बन जाती हैं। तमिलनाडु के तिरुवन्नमलाई ज़िले की पहाड़ियों से निकली वी श्रीपथी की कहानी ऐसी ही है। एक ऐसी महिला की, जिसने परिस्थितियों से हार नहीं मानी, बल्कि उन्हें अपने कदमों की सीढ़ी बना लिया। एक 23 साल की आदिवासी महिला ने अपने सपने को पूरा किया। उनके सपनों के बीच न तो उनका माृतत्व आया और न ही उनकी आर्थिक परस्थितियां रोड़ा बनीं। आइए जानते हैं वी श्रीपथी के बारे में। CG – कबाड़ व्यवसायी पर दो बदमाशों का हमला, कैश और मोबाइल लूटकर फरार कौन हैं वी श्रीपथी? 23 वर्षीय वी श्रीपथी मलयाली जनजाति से ताल्लुक रखती हैं। उनका बचपन पुलियूर गांव के सरकारी स्कूल में बीता, जहां उन्होंने तमिल माध्यम से पढ़ाई की। परिवार आर्थिक रूप से मज़बूत नहीं था, लेकिन सपनों की ऊंचाई हमेशा बड़ी रही। श्रीपथी ने मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर कानून (LLB) की पढ़ाई पूरी की और तमिलनाडु पब्लिक सर्विस कमीशन (TNPSC) की सिविल जज परीक्षा की तैयारी शुरू की। बच्चे के जन्म के बाद दी परीक्षा शादी और मातृत्व के बीच भी उन्होंने अपनी पढ़ाई को नहीं छोड़ा। यही नहीं, बच्ची को जन्म देने के मात्र दो दिन बाद वे अपने पति के साथ लगभग 250 किलोमीटर का सफर तय कर चेन्नई पहुंचीं और परीक्षा दी। यह केवल एक परीक्षा नहीं थी, यह उनके अदम्य साहस, समर्पण और नारी शक्ति का प्रमाण था। सीसी मेंबर रामधेर का बड़ा कदम: 50 नक्सलियों के साथ किया सरेंडर, पखांजूर महला कैंप में मचा हड़कंप बनीं तमिलनाडु की पहली आदिवासी महिला सिविल जज श्रीपथी के इस जज़्बे ने तमिलनाडु के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। वे राज्य की पहली आदिवासी महिला सिविल जज बनीं। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने खुद ट्वीट कर उनकी इस उपलब्धि की सराहना की और कहा, "पहाड़ी गाँव की बेटी ने कम उम्र में इतिहास रच दिया है।" उनकी सफलता इस बात की गवाही है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, इच्छाशक्ति के आगे सब झुक जाता है। वी श्रीपथी उन तमाम बेटियों की प्रतीक हैं जो सामाजिक सीमाओं और परिस्थितियों की दीवारें तोड़कर आगे बढ़ रही हैं। आज जब महिलाएँ हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं, श्रीपथी की यह कहानी हर माँ, हर छात्रा और हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणा है जिसने कभी सपने देखे हैं, लेकिन डर के कारण उन्हें अधूरा छोड़ दिया।

Tags :

Share News:

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें