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Vishva News / Mon, Jul 13, 2026 / Post views : 41
कवर्धा - वनांचल क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई गोठान योजना अब कई स्थानों पर बदहाली का शिकार होती दिखाई दे रही है। लाखों रुपये की लागत से बने भवन, शेड और अन्य संरचनाएं रखरखाव के अभाव में जर्जर हो रही हैं। कई गोठानों की छतें गायब हैं, जबकि परिसर बिना सुरक्षा व्यवस्था के खुले पड़े हैं।
बेंदा गोठान की स्थिति चिंताजनक
ग्राम पंचायत बेंदा का गोठान इस लापरवाही का प्रमुख उदाहरण बन गया है। यहां भवन की छत पूरी तरह गायब हो चुकी है, जिससे बारिश और धूप के कारण संरचना तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही है। परिसर में नियमित उपयोग या देखरेख के कोई संकेत भी दिखाई नहीं देते।
योजना का उद्देश्य अधूरा
ग्रामीणों का कहना है कि योजना का मकसद पशुपालकों को सुविधाएं उपलब्ध कराना और आजीविका को मजबूत करना था, लेकिन अधिकांश गोठान उपयोगहीन हो चुके हैं। रखरखाव और निगरानी के अभाव में करोड़ों की सरकारी संपत्तियां धीरे-धीरे खंडहर में बदल रही हैं।
ग्रामीणों की मांग
स्थानीय लोगों ने सभी गोठानों का भौतिक सत्यापन, आवश्यक मरम्मत और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से निर्मित परिसंपत्तियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि योजना का वास्तविक लाभ ग्रामीणों और पशुपालकों तक पहुंच सके।
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