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PRAVEEN GUPTA / Sat, May 16, 2026 / Post views : 126
प्रवीण गुप्ता। इंदौर। भोजशाला को लेकर वर्षों से चले आ रहे विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। 15 मई को सुनाए गए इस महत्वपूर्ण निर्णय में कोर्ट ने हिंदू पक्ष के दावे को स्वीकार करते हुए भोजशाला परिसर को माँ सरस्वती यानी माँ वाग्देवी का मंदिर माना है।
इंदौर बेंच के जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विवादित परिसर का धार्मिक स्वरूप “भोजशाला और देवी वाग्देवी सरस्वती के मंदिर” के रूप में माना जाता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि परिसर का संरक्षण पहले की तरह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास ही रहेगा।
अदालत ने हिंदू पक्ष को परिसर में पूजा का अधिकार देते हुए कहा कि तीर्थयात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना, कानून व्यवस्था बनाए रखना और देवता की पवित्रता व मूल स्वरूप को संरक्षित रखना प्रशासन की संवैधानिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी माना कि समय के साथ यहां हिंदू पूजा की परंपरा कभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।
कमाल मौला मस्जिद मानता रहा मुस्लिम पक्ष
दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष इस स्थल को कमाल मौला मस्जिद मानता रहा है। अदालत ने मुस्लिम पक्ष से कहा कि वे मस्जिद के लिए सरकार से वैकल्पिक भूमि की मांग कर सकते हैं।
फैसले के बाद धार और इंदौर में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। दोनों समुदायों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई।
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