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: AI Question Cost: हर सवाल की ‘कीमत’ Environment पर, पैसा नहीं बिजली-पानी बह रहा है

Vishva News / Tue, Aug 26, 2025 / Post views : 24

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AI का तेजी से बढ़ता उपयोग

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहा है। भारत भी उन देशों में शामिल है जहां एआई प्लेटफॉर्म जैसे ChatGPT, Gemini और Perplexity का इस्तेमाल बहुत अधिक हो रहा है। लोग इन प्लेटफॉर्म पर सवाल पूछते हैं और AI उन्हें झटपट जवाब देता है। AI लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हर सवाल की एक ‘कीमत’ होती है? यह कीमत पैसों में नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण पर चुकाई जाती है।

Environment पर असर

हाल की रिपोर्टों के अनुसार, एआई के इस्तेमाल का पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। AI मॉडल को चलाने के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, जिन डेटा सेंटरों से ये मॉडल काम करते हैं, उन्हें ठंडा रखने के लिए करोड़ों लीटर पानी की जरूरत होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि AI के बढ़ते उपयोग से ऊर्जा की खपत और जल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। छोटे सवाल से लेकर बड़े डेटा प्रोसेसिंग तक, हर क्रिया पर्यावरण पर असर डालती है।

डेटा सेंटर और ऊर्जा की खपत

AI प्लेटफॉर्म में काम करने वाले डेटा सेंटर 24/7 सक्रिय रहते हैं। इन सेंटरों में सर्वर लगातार काम करते हैं और गर्म हो जाते हैं। इन्हें ठंडा रखने के लिए विशेष कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें पानी और बिजली की भारी खपत होती है।
  • अनुमानित रूप से, एक बड़े AI मॉडल को चलाने के लिए किलोवाट्स में बिजली और लाखों लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
  • जैसे-जैसे AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है, डेटा सेंटरों की संख्या भी बढ़ रही है और साथ ही ऊर्जा और जल संसाधनों पर दबाव भी बढ़ रहा है।

AI की लागत: पैसा नहीं, पर्यावरण

हर सवाल का जवाब देने के लिए जो संसाधन खर्च होते हैं, उन्हें पैसों में नहीं मापा जा सकता। असली कीमत पर्यावरणीय नुकसान की होती है।
  • ऊर्जा की भारी खपत से कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है।
  • जल संसाधनों की खपत से स्थानीय इकोसिस्टम प्रभावित होते हैं।
  • लगातार बढ़ती AI गतिविधि से जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।

निष्कर्ष

AI सवालों का जवाब झटपट देता है, लेकिन इसके पीछे पर्यावरणीय कीमत छिपी हुई है। जितना अधिक हम AI का इस्तेमाल करेंगे, उतनी ही ऊर्जा और पानी की खपत होगी। इसलिए जरूरी है कि AI का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक और जिम्मेदारी से किया जाए, ताकि हमारी तकनीकी उन्नति पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए।

AI and Environment – MIT Technology Review

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