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Vishva News / Thu, Jul 23, 2026 / Post views : 22
कवर्धा। शहर की मुख्य सड़कों, चौक-चौराहों और बाजार क्षेत्रों में आवारा गौवंश की बढ़ती संख्या लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। सड़क के बीच बैठे या घूमते पशुओं के कारण यातायात प्रभावित हो रहा है और वाहन चालकों को हर समय दुर्घटना का डर बना रहता है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस समस्या के समाधान की मांग कर रहे हैं।
बढ़ती समस्या पर सवाल
शहरवासियों का कहना है कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है—सरकार, प्रशासन या पशुपालक? यदि पशुओं को खुले में छोड़ने वालों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तो समस्या और गंभीर होती जाएगी। नागरिकों का मानना है कि केवल अस्थायी अभियान चलाने से समाधान संभव नहीं है।
हादसों की आशंका बरकरार
रात के समय सड़क पर बैठे गौवंश सबसे अधिक खतरा पैदा करते हैं। दोपहिया वाहन चालक, स्कूली बच्चे और बुजुर्ग अक्सर जोखिम उठाकर सफर करने को मजबूर हैं। कई बार वाहन चालक पशुओं को बचाने के प्रयास में दुर्घटना का शिकार भी हो चुके हैं।
स्थायी व्यवस्था की जरूरत

लोगों का कहना है कि यदि शहर में आवारा गौवंश के लिए व्यवस्था है, तो फिर वे सड़कों पर क्यों दिखाई दे रहे हैं। गौशालाओं की क्षमता बढ़ाने, नियमित पकड़ अभियान चलाने और पशुपालकों की जवाबदेही तय करने की मांग लगातार उठ रही है।
प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद
शहरवासियों का मानना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को समय रहते ठोस और स्थायी कदम उठाने चाहिए। नियमित निगरानी, प्रभावी प्रबंधन और नियमों का सख्ती से पालन ही इस समस्या का स्थायी समाधान साबित हो सकता है।
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