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: पाकिस्तान में आजादी के बाद पहली बार, LUMS ने संस्कृत कोर्स को यूनिवर्सिटी पाठ्यक्रम में शामिल किया

Vishva News / Sun, Dec 14, 2025 / Post views : 15

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लाहौर: पाकिस्तान में आजादी के बाद पहली बार एक यूनिवर्सिटी ने संस्कृत भाषा पर कोर्स शुरू किया गया है। लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज यानी कि LUMS ने पहले 3 महीने का वीकेंड वर्कशॉप शुरू किया था, लेकिन लोगों से मिले जबरदस्त रिस्पॉन्स के बाद इसे पूरे 4 क्रेडिट का यूनिवर्सिटी कोर्स बना दिया गया है। यूनिवर्सिटी के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि इस वीकेंड वर्कशॉप को छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों समेत सबके लिए खोला गया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में पंजाब यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में संस्कृत के पुराने दस्तावेजों का बड़ा लेकिन उपेक्षित संग्रह है। Manya Shaktawat: राजस्थान की मान्या शक्तावत ने 50 घंटे तक लगातार घोड़े की सवारी कर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, युवाओं को दी प्रेरणा

'आने वाले वक्त में बढ़ेगी छात्रों की संख्या'

अधिकारी ने कहा, '1930 के दशक में विद्वान जेसीआर वूलनर ने संस्कृत की ताड़ पत्रों पर लिखी कई पांडुलिपियों को सूचीबद्ध किया था, लेकिन 1947 के बाद से कोई पाकिस्तानी विद्वान इस संग्रह से नहीं जुड़ा। सिर्फ विदेशी शोधकर्ता ही इसका इस्तेमाल करते हैं। अगर हम स्थानीय विद्वानों को ट्रेनिंग दें, तो यह बदल सकता है।' गुरमानी सेंटर के डायरेक्टर डॉ. अली उस्मान कासमी ने ट्रिब्यून को बताया, 'जब हमने लोगों का रिस्पॉन्स देखा, तो हमने इसे एक यूनिवर्सिटी कोर्स के रूप में शुरू करने का फैसला किया। अभी छात्रों की संख्या कम है, लेकिन हमें उम्मीद है कि अगले कुछ सालों में यह बढ़ेगी। 2027 की वसंत ऋतु तक हम इस भाषा को साल भर चलने वाले कोर्स के रूप में पढ़ा सकेंगे।'

भगवद्गीता, महाभारत पर भी होंगे कोर्स

कासमी ने कहा कि LUMS अब भगवद्गीता और महाभारत पर कोर्स शुरू करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा, 'उम्मीद है कि इससे एक गति बनेगी। 10-15 सालों में हम पाकिस्तान में ही भगवद्गीता और महाभारत के विद्वानों को देख सकेंगे।' ट्रिब्यून के मुताबिक, इस कोर्स को शुरू करने का श्रेय लाहौर के फॉर्मन क्रिश्चियन कॉलेज में समाजशास्त्र के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शाहिद रशीद को जाता है। डॉ. रशीद ने बताया कि उन्होंने संस्कृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से सीखी, क्योंकि देश में कोई स्थानीय किताबें उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने कैम्ब्रिज की संस्कृत विद्वान एंटोनिया रूपेल और ऑस्ट्रेलियाई इंडोलॉजिस्ट मैककोमास टेलर से मार्गदर्शन लिया। CG Vidhan Sabha Winter Session LIVE: वित्त मंत्री ओपी चौधरी का बयान, ‘विजन 2047’ में एक लाख लोगों की सलाह को किया शामिल

'संस्कृत किसी एक धर्म से बंधी नहीं है'

ट्रिब्यून में डॉ. रशीद के हवाले से कहा गया, 'शास्त्रीय भाषाएं मानवता के लिए बहुत ज्ञान रखती हैं। मैंने पहले अरबी और फारसी सीखी, फिर संस्कृत पढ़ी। शास्त्रीय संस्कृत व्याकरण को कवर करने में लगभग एक साल लगा। और मैं अभी भी इसे पढ़ रहा हूं।' डॉ. रशीद ने आगे कहा, 'मैं लोगों को बताता हूं कि हम इसे क्यों न सीखें? यह पूरे क्षेत्र को बांधने वाली भाषा है। संस्कृत व्याकरण के प्रकांड पंडित पाणिनि का गांव इसी क्षेत्र में था। सिंधु घाटी सभ्यता के समय यहां बहुत लेखन हुआ था। संस्कृत एक पहाड़ की तरह है, एक सांस्कृतिक स्मारक है। हमें इसे अपनाना चाहिए। यह हमारी भी है; यह किसी एक धर्म से बंधी नहीं है।'

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