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Vishva News / Wed, Dec 3, 2025 / Post views : 33
रूसी संसद के निचले सदन ‘ड्यूमा’ के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोदिन ने सदन के पूर्ण अधिवेशन में कहा, ‘‘भारत के साथ हमारे संबंध रणनीतिक और व्यापक हैं और हम इस संबंध को महत्व देते हैं। हम समझते हैं कि समझौते को मंजूरी निश्चित रूप से दोनों देशों के संबंधों के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।’’
बता दें कि, भारत और रूस के बीच हुआ यह समझौता कई मायनों में बेहद अहम है। समझौता के तहत यह तय किया गया है कि भारत और रूस की सैन्य टुकड़ियों के बीच समन्वय कैसा होगा। सैन्य विमान और युद्धपोत कैसे भेजे जाएंगे साथ ही दोनों देशों के बीच सैन्य साजो सामान की पहुंच किस तरह की जाएगी। यह समझौता सिर्फ सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती तक सीमित नहीं है बल्कि साजो सामान संबंधी व्यवस्थाओं को भी तय करता है।
रूसी संसद के निचले सदन ‘ड्यूमा’ की वेबसाइट पर भी इसे लेकर एक नोट पोस्ट किया गया है। नोट में कहा गया है कि समझौते की मंजूरी से रूस और भारत के विमानों, युद्धपोतों को दोनों देशों के हवाई क्षेत्र और बंदरगाहों के इस्तेमाल की सहूलियत मिलेगी। समझौते के तहत तय की गई प्रक्रिया का इस्तेमाल संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण, मानवीय सहायता, आपदा के बाद राहत कार्यों और अन्य सहमति वाले मामलों में किया जाएगा।
Human Trafficking Case: सरगुजा से उज्जैन ले जाकर बेची गई युवतियाँ, पुलिस ने एक को छुड़ाया, दूसरी की तलाश जारीइस बीत यहां यह भी बता दें कि, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है। इनमें सबसे अहम ब्रह्मोस मिसाइल के अगले पीढ़ी के वर्जन का निर्यात और सह-उत्पादन समझौता शामिल है। साथ ही S-500 एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति और तकनीकी सहयोग पर भी वार्ता हो सकती है। इसके अलावा नए लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्टर के संयुक्त उत्पादन या खरीद पर भी मुहर लग सकती है।
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