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Vishva News / Sun, Jan 11, 2026 / Post views : 46
ईरानी कानून के आर्टिकल 186 में कहा गया है कि अगर कोई समूह या संगठन इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ हथियारबंद विरोध करता है, तो उसके सभी सदस्यों या समर्थकों को, जो जानबूझकर उसके मकसद में मदद करते हैं, 'मोहारेब' (अल्लाह का दुश्मन) माना जा सकता है, भले ही वो व्यक्तिगत रूप से हथियारबंद गतिविधियों में हिस्सा ना लें। कानून के अनुच्छेद 190 में 'मोहारेब' के लिए बताई गई सजा बेहद कड़ी हैं। इनमें फांसी, दाहिना हाथ और बायां पैर काटना या स्थायी निर्वासन शामिल है।
अमेरिका की ओर से लगातार दी रही चेतावनियों के बीच बयान में कहा गया है, "सरकारी वकीलों को सावधानी से और बिना किसी देरी के, आरोप पत्र जारी करके, उन लोगों के खिलाफ मुकदमे और निर्णायक फैसले के लिए जमीन तैयार करनी चाहिए, जो देश के साथ विश्वासघात करके और असुरक्षा पैदा करके, देश पर विदेशी प्रभुत्व चाहते हैं।" बयान में यह भी कहा गया है कि कार्रवाई बिना किसी नरमी, दया या रियायत के होनी चाहिए।
2026 का पहला मिशन: ISRO लॉन्च करेगा Earth Observation सेटेलाइट, जानें पूरी डिटेलईरान में हालात को देखते हुए निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया और प्रदर्शनकारियों से सड़कों पर आने की अपील की है। इसमें ईरान का पुराना शेर-और-सूरज वाला झंडा और शाह के समय के अन्य राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर "सार्वजनिक जगहों पर कब्जा करने" के लिए कहा गया है।
ईरान में विरोध प्रदर्शन इस्लामिक रिपब्लिक के प्रति जनता के असंतोष के रूप में शुरू हुए, जब दिसंबर 2025 के आखिर में ईरानी रियाल मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। इसके बाद से विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ता गया है और अब ये सरकार विरोधी प्रदर्शनों में बदल गए हैं।
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