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: ‘राम नाम सत्य है’… जिंदा बेटी की अंतिम यात्रा निकालकर पिता ने जलाई चिता, जानें क्या है पूरा मामला

Vishva News / Wed, Sep 3, 2025 / Post views : 51

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ओडिशा के गंजाम जिले से एक चौंकाने वाली और दुखद घटना सामने आई है, जहां एक लड़की द्वारा अपनी पसंद से शादी करने पर उसके अपने ही परिवार ने उसे ‘मृत’ मान लिया और प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार तक कर डाला। यह घटना गंजाम जिले के कविसूर्यनगर थाना क्षेत्र के बलियापल्ली गांव की है। गांव के रहने वाले निरंजन गौड़ की बेटी ने दूसरी जाति के युवक से लव मैरिज कर ली। इस बात से लड़की के परिवार और समाज में भारी नाराजगी फैल गई। इसके बाद जो हुआ, उसने सभी को हैरान कर दिया। Asia Cup 2025: हार्दिक पांड्या के पास रिकॉर्ड बनाने का सुनहरा मौका, अब तक केवल 3 भारतीय कर सके हैं ऐसा

केले के पेड़ को बेटी का प्रतीक मानकर 'शव' बनाया

परिजनों ने जैसे किसी की मौत होने पर अंतिम संस्कार किया जाता है, वैसे ही एक केले के पेड़ को बेटी का प्रतीक मानकर 'शव' बनाया। उसे नई साड़ी पहनाई, शव की तरह सजाया और पूरे गांव में घुमा दिया। घंटी और मृदंग बजाते हुए गांव के लोग "राम नाम सत्य है" बोलते हुए झूठे शव की यात्रा निकालते हैं। इसके बाद, गांव के श्मशान में ले जाकर केले के पेड़ का प्रतीकात्मक दाह संस्कार कर दिया गया।

घटना का वीडियो हो रहा वायरल

इस पूरे 'नाटक' का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस अमानवीय और जातिवादी सोच की जमकर आलोचना कर रहे हैं। इस घटना के पीछे की मानसिकता वही पुरानी सोच है जिसमें जाति से बाहर शादी करना पाप माना जाता है। जब कोई युवा इस परंपरा को तोड़ता है, तो कई बार उसके खिलाफ पूरे परिवार और समाज का गुस्सा टूट पड़ता है। कई समुदायों में ऐसे मामलों में ‘शुद्धि क्रिया’ या ‘परिवार की मर्यादा की रक्षा’ के नाम पर नाटक रचा जाता है, जैसे कि बेटी अब इस दुनिया में ही नहीं रही। Asia Cup 2025: हार्दिक पांड्या के पास रिकॉर्ड बनाने का सुनहरा मौका, अब तक केवल 3 भारतीय कर सके हैं ऐसा

बेटी को इतनी बड़ी सजा देना क्या सही है?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या अपनी पसंद से शादी करना इतना बड़ा अपराध है कि माता-पिता अपनी ही संतान को मरा हुआ मान लें? जो माता-पिता अपनी बेटी को बचपन से पालते हैं, पढ़ाते हैं, उसी बेटी के खिलाफ इतनी बड़ी सजा क्या सही है? आज जब दुनिया चांद और मंगल तक पहुंच गई है, वहीं हमारे समाज के कुछ हिस्से अब भी जाति और झूठे संस्कारों में उलझे हुए हैं। एक लड़की ने बस अपने मनपसंद लड़के से शादी की, लेकिन उसे समाज से बहिष्कृत कर दिया गया।

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