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Vishva News / Mon, Jul 20, 2026 / Post views : 16
बिलासपुर। 17 जुलाई 2026 को हुई मूसलाधार बारिश ने न्यायधानी बिलासपुर की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने ला दी। कुछ ही घंटों की बारिश में शहर की प्रमुख सड़कें नदी में बदल गईं, कई कॉलोनियां जलमग्न हो गईं और हजारों घरों में पानी घुस गया। व्यापारिक प्रतिष्ठानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ, जबकि कई परिवारों का घरेलू सामान पानी में बह गया। कई इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।
राहत के दावों पर जनता के सवाल
बारिश के बाद प्रशासन, जनप्रतिनिधि और अधिकारी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत और सहायता का भरोसा दे रहे हैं। हालांकि इस बार लोगों का गुस्सा साफ नजर आ रहा है। नागरिकों का कहना है कि आपदा के बाद राहत देने से अधिक जरूरी आपदा से पहले प्रभावी तैयारी करना था।
ड्रेनेज और सीवरेज परियोजनाओं पर सवाल
शहरवासियों का कहना है कि मौसम विभाग पहले ही भारी बारिश की चेतावनी दे चुका था। इसके बावजूद नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था और संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त तैयारी क्यों नहीं की गई? लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सीवरेज और ड्रेनेज परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हर साल शहर जलभराव की समस्या से क्यों जूझता है।
स्थायी समाधान और जवाबदेही की मांग
नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त की जाती तो जन-धन की इतनी बड़ी हानि टाली जा सकती थी। अब लोग केवल मुआवजे और सर्वे नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
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